ज़िन्द्गी गुजारने के लिये नही जीने के लिये है एह्सास छुने के लिये नही महसुस करने के लिये है आंखे देखने के लिये नही गौर करने के लिये है कान सुनने के लिए नही ध्यान देने के लिये है शब्द कलम से खेलने के लिये नही जीवन मे उतारने के लिये है
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