Thursday, 16 May 2013

 

                                       ना शिवाले ना खलीसा ना हरम झुटे है 
                                      बस यही सच है की तुम झुटे हो हम झुटे है
      किसी शायर ने ये खुब कहा की हम झुटे है...हा हम झुटे ही तो है ये आज़ादी जो हमे देश के वीर सपुतो की शहादत के बाद मिली है जाते जाते उन भारत मा के बेटो ने हमसे ये उम्मीद रखी की हम इस आज़ादी को बरकरार रखेंगे लेकिन हम्ने ये ज़िम्मेदारी सफेद्पोश नेताओ को दे दी ज़िनके वस्त्र जित्ने सफेद कारनामे उतने ही काले लेकिन भाइ हमारे देश के संविधान मे एक अधिकार है स्वत्ंत्रता का...हर एक नाग्रिक को ये अधिकार हासिल  है तो फिर हम सब आज़ाद है ........................
            सच ही तो  है आज हम आज़ाद है और इतने आजाद है की कोइ शख्स आज धर्म की दुहायी देकर 
कभी हमारे जज्बातो से खेलता है तो कभी हमारे ही देश मे हमे मन्दिर मे घंटी बजाने से रोक देता है,
हमारी सरकार फिर भी खामोश रहती है क्योकि वो अल्प्सख्यंक के नाम दर्ज़नो बच्चे पैदा कर जनसंख्या के आंकडो को अव्व्ल दर्ज़े पर लाने की कोशिश करने वालो से काफी खुश है। खैर ये हमारा मुद्दा नही हम तो ये कह्ना चाह्ते है की इस्लाम के नाम पर वन्दे मातरम गीत का अपमान करने वाले महाश्य की आरती उतारना बन्द करे और उसे एसे देश मे भेज दिय जाये जहा उसके धर्म के खिलाफ कुछ ना हो क्योकि भारत तो स्वत्ंत्र देश है और कोइ कहि भि माथा टेक सकता है...मै याद दिलाना चाह्ती हु मेरे देश नागरिको को की  1952 मे मौलाना आजाद ने किसी सरकारी  कार्यक्रम मे जब वन्दे मातरम सुना तो वे बोले की ये गीत सीधा दिल को छुता है ये गीत दिल और दिमाग  को झक्झोर देता है उन्होने तो इस गीत को धर्म का काला चश्मा पहन कर नही देखा...और हमारे देश के राश्ट्र्पति रह चुके ए.पी.जे.कलाम साह्ब भी तो इस गीत को सुनते थे तो क्या ये लोग इस्लाम से वाकिफ नही थे या की ये मुस्लिम नही थे ..नही वे मुस्लिम भी है और इस्लाम को जानते है लेकिन वे इस सरफिरे सांसद श्फीकुर्र्हमान के जेसे खोखले नही है एसे इंसानो को अलविदा कर देना चाहिये क्योकि ये वो ही ज़हर की जड है जो भारत मे साम्प्रदायिक्ता को फैलाने के लिये ही इस देश मे है.......
                         हमने देखा ही नही अब तक बोलते उनको     
                         कोन कहता है की पत्थर के सनम झुटे है......
   ये वतन हमारी मा है और मा तो होती ही शीश झुकाने के लिय है तो फिर विवाद केसा ..??
अनामिका विजय्
                       
                                  

Tuesday, 7 May 2013




               भट्काव्

रास्तो मे भी अब तो रास्ते नही 
रिश्ते अगर खुन के है तो भी दर्द् किसी के वास्ते नही
जिस गोद मे सोये बरसो,जिन हाथो के सहारे चले
जिस शक्स से बोलना सीखा जिस घर मे पले
जिस्ने हमे पहचान दी,जिसने हमे नाम दिया
जिसने हमे ज्ञान दिया,ज़िन्द्गी का वरदान दिया
वो लोग आज पुराने हो गये
उनके वचन सुन तुम कह्ते हो के वो अब सयाने हो गये
गोद अब मा की हमे भाती नही 
नीन्द अब फेस्बुक के बिना आती नही
जिस पिता के सहारे बार बार लड्ख्डाकर भी अपने पैरो पर् खडे हुए  

उस पिता को आज सहारे के लिये लकडी थमा दी
क्योकी हाथो मे तो गर्लफ्रेन्ड् ने अपनीबिल्ली पकडा दी
जिस परिवार ने बात करने के लिए बोल दिए...
उसी परिवार को एक गहरी खामोशी दे दी
अपने बोलो से एसे तोडा गुरुर उनका वो फिर बोल ही न सके
गैरो के संग शब्दो की माला पिरो ली
जिस घर मे पले अब वो छोटा लगता है
महलो का अरमान लिए निकले घर से
बाहर आकर देखा दुनिया मे
मेरा घर मेरी जन्नत है ,मा बाप हमारे दौलत दुनिया की है
लेकिन अब खो गया है सब
बस पत्थर हुआ दिल 
और हर पल मुझको रोता लगता है
ज़िन्द्गी का ये सफर अब बोझ लगता है।

अनामिका विजय्


Friday, 3 May 2013

Thursday, 2 May 2013

बिटिया



“अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजो”
आज अखबार देखने से तो एसे डर लगने लगा है जेसे शोले पिक़्चर मे 20 कोस दुर के बच्चो को गब्बरसिंघ से लगता था।क्या जाने आज कोनसे शहर मे कितने साल की बच्ची को अपना शिकार बनाया होगा किसी हवस के मारे इंसान कह्लाने वाले किसी दरिन्दे ने,
जाने किस शहर के कोनसे अस्पताल मे एक बेटी को जन्म लेने से पह्ले ही मौत दे दी गयी हो। जाने कोनसे उजाड खेत मे किसी नवजात बेटी के शव को कुत्ते नोच रहे होंगे। जाने किसके बदनसीब माता पिता अस्पताल मे अपनी दहेज की आग मे झुलसी बेटी की लाश के पास खडे आंसु बहा रहे होंगे। एसी खबरो से मेरे दिल मे एक दह्श्त जन्म लेती है मे रातो मे सोये सोये खुद को गहन अन्ध्कार मे पाती हु मे रास्ता डुंड रही हु लेकिन मे कुछ देख नही पा रही तब पसीने से लथपथ मे घबराकर जाग जाती हु और एक राहत की सांस लेती हु की ये एक सपना था फिर यकायक उनकी सोच दिमाग मे आती है जो इन सब को फेस कर रही जो मेरी कुछ नही लगती...... कितना दर्द होगा हर उस बेटी के जीवन मे जिसने भी इस पंक़्ति को दोहराया होगा, ....             ........“अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजो ।” कितना बडा सच है ये मे
तो खुद कहती हु की हे इश्वर अगर तेरी दुनिया मे लड्की का ये ही हश्र होना है तो मेरी सात पुश्तो मे लड्की पैदा ना हो और मुझे इस जनम तो किया लेकिन अग्ले जन्म मुझे भी बेटी ना कीजो..........
अनामिका विजय