Thursday, 2 May 2013

बिटिया



“अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजो”
आज अखबार देखने से तो एसे डर लगने लगा है जेसे शोले पिक़्चर मे 20 कोस दुर के बच्चो को गब्बरसिंघ से लगता था।क्या जाने आज कोनसे शहर मे कितने साल की बच्ची को अपना शिकार बनाया होगा किसी हवस के मारे इंसान कह्लाने वाले किसी दरिन्दे ने,
जाने किस शहर के कोनसे अस्पताल मे एक बेटी को जन्म लेने से पह्ले ही मौत दे दी गयी हो। जाने कोनसे उजाड खेत मे किसी नवजात बेटी के शव को कुत्ते नोच रहे होंगे। जाने किसके बदनसीब माता पिता अस्पताल मे अपनी दहेज की आग मे झुलसी बेटी की लाश के पास खडे आंसु बहा रहे होंगे। एसी खबरो से मेरे दिल मे एक दह्श्त जन्म लेती है मे रातो मे सोये सोये खुद को गहन अन्ध्कार मे पाती हु मे रास्ता डुंड रही हु लेकिन मे कुछ देख नही पा रही तब पसीने से लथपथ मे घबराकर जाग जाती हु और एक राहत की सांस लेती हु की ये एक सपना था फिर यकायक उनकी सोच दिमाग मे आती है जो इन सब को फेस कर रही जो मेरी कुछ नही लगती...... कितना दर्द होगा हर उस बेटी के जीवन मे जिसने भी इस पंक़्ति को दोहराया होगा, ....             ........“अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजो ।” कितना बडा सच है ये मे
तो खुद कहती हु की हे इश्वर अगर तेरी दुनिया मे लड्की का ये ही हश्र होना है तो मेरी सात पुश्तो मे लड्की पैदा ना हो और मुझे इस जनम तो किया लेकिन अग्ले जन्म मुझे भी बेटी ना कीजो..........
अनामिका विजय 

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